Tuesday, 30 August 2011

"ईद मुबारक"

हों सुखन ऐसे जहाँ में, चाँद तू ऐसा निकल.
जो भी मांगें, जो भी मांगे, मांगना हो न विफल.

की इबादत, हम सभी ने, एक दिन या चार दिन,
हम जुड़े तुझसे, सुकूँ दिल, कद्रदां तू अब पिघल.

तू मेरी मासूमियत का, जश्न कुछ ऐसा मना.
भोली भाली हरकतों से, "ईद" में सब मन विरल.

मांगता हूँ तुझसे ईदी, ए बुजुर्ग मेरे अज़ीज़.
मुआफ़ करना हर ख़ता पर, गर जवानी हम फिसल.

हर तरफ इंसानियत, बिखरा करे कुछ इस तरह.
खूँ, मरीजों को जिलाने, दान को अब सब निकल.


Monday, 29 August 2011

गीत – “तू चलता चल, तू चलता चल”

तू चलता चल, तू चलता चल.
है प्राप्त अभी, आधा ही फल.
तू चलता चल, तू चलता चल.

है लक्ष्य प्रबल, तू अविजित चल.
तू चलता चल, तू चलता चल.

मन रख संबल, कर मार्ग सरल.
तू चलता चल, तू चलता चल.

संचित कर चल, तन-मन-धन-बल.
तू चलता चल, तू चलता चल.

जब सच का  दल, सत्ता हलचल,
तू चलता चल, तू चलता चल.

दृढ निश्चय से, निकलेगा हल.
तू चलता चल, तू चलता चल.

जब सत्यं बल, अच्छा हो फल,
तू चलता चल, तू चलता चल.

संस्कृति में ढल, पाए गा कल, 
तू चलता चल, तू चलता चल.

कर मत तू छल, बन गंगा जल.
तू चलता चल, तू चलता चल.

Sunday, 21 August 2011

जोगन गीत - "मुझे प्यार हो गया"

(कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष)

मैंनूँ जोगणी बनाता,
मुझे, अब कुछ, नहीं है भाता,
सुन सांवरे सलोने,
मुझे प्यार हो गया.

चाहे साथ, पड़ें न फेरे,
भाये, तुम मनवा मेरे,
मेरे बचपन के सरताज,
मुझे प्यार हो गया.

मैं पनिया भरन को जाऊं,
हाँ, जब पनिया भर के लाऊं,
फोड़े मटकी, भीगूँ सारी,
दिल आप खो गया.
मुझे प्यार हो गया.

तू सब-संग रास रचाता,
मन घुट-घुट घुटता जाता,
यशोदा के कन्हैया,
मुझे प्यार हो गया.

तेरी बंसुरी की धुन में,
वृन्दावन-कुञ्ज गलिन में,
नाचूं मैं तेरी राधा,
मुझे प्यार हो गया.

जब सरिता-मज्जन करती,
सखियों संग, जल-क्रीडा भी,
सब वसन, छुपा है लेता,
कान्हा, श्याम हो गया.
मुझे प्यार हो गया.

मैंनूँ जोगणी बनाता,
मुझे, अब कुछ, नहीं है भाता,
सुन सांवरे सलोने,
मुझे प्यार हो गया.

Monday, 15 August 2011

नज़्म - “उल्लू”

आपको बतला रहा था, मैं कभी से दोस्तों
शाख पर उल्लू है बैठा, भा गया ए दोस्तों.

जागती जब सारी दुनिया, सो रहा आराम से,
रात में मज़बूर करता, जागने को दोस्तों.

है बड़ा मनहूस, सारी कौम पर दादागिरी
खून चूसे जा रहा है, जोंक सा ए दोस्तों.

गर गुलामी आपको, उसकी नहीं मंज़ूर हो
शाख से उसको भगाओ, आज फिर ए दोस्तों.

पूजती उसको है दुनिया, धन के वाहन के लिए
खुद है सोने सा है बैठा, कर दरख़्त ए दोस्तों.

सीख लो जड़ खोदना, आबो हवा औ सींचना
मौसमे बरसात में, बो दो कलम ए दोस्तों.

सब्र रखना मेहनतें हैं, रंग लायेंगी सभी
दूध और दही की नदियाँ, फिर बहें  ए  दोस्तों.

देश-भक्ति गीत – “मेरा भारत देश है ऐसा”

मेरा भारत देश है ऐसा, सदके में है सिर झुकता.

जिसमें, जीवन काशी-शिव, संरक्षण दे अन्नपूर्णा.
मणिकर्णिका अंतिम पल, गंगे तुझमें है मिलना.

मेरा भारत देश है ऐसा.

मंदिर वह, जिसमें रहता, पति-पत्नी का सम्बन्ध.
अनगिनत सूत्रधारों से, भावों का हो सत्संग.

मेरा भारत देश है ऐसा.

है कृपा विश्वकर्मा की, कितने दधीच हैं तेरे.
धरती का हर अन्वेषण, तेरी नींव तले ही उपजे.

मेरा भारत देश है ऐसा.

तुम कल-कल नाद सरस्वती, हो श्वेत, शांत, प्रखर सी.
जीवन की कला निहित है, आदर्शों की तू धरणी.

मेरा भारत देश है ऐसा.

पर्वत छोटे, ऊँचे भी, नदियाँ, अविरल उदगम भी.
सागर से जो है लिपटी, खनिजों से शोभित गरिमा.

मेरा भारत देश है ऐसा.

हर दिन पंचांग में त्योहार, गिरिजा, मस्जिद से हो प्यार.
नानक की अमृत वाणी, सुन्दर सी नित नयी कहानी.

मेरा भारत देश है ऐसा.

मेरा भारत देश है ऐसा, सदके में है सिर झुकता.

Friday, 5 August 2011

कविता - “ युवी ”

कदम रखा,
आज मैंने,
जवानी की दहलीज़ पर.

उधर से आवाज़ आई,

कोयले की कोठारी में, जितनो भी सयानो जाये,
कालिख लगे न लगे, संत वो न कहलाये.

मैंने सोचा.
सब बकवास.
मैं ठीक, मेरा वजूद ठीक.
थोड़ी मस्ती, थोड़ी मौज, सब पुण्य.

पर मैं बेचारा, दोस्ती का मारा.

जिज्ञासा,
एक के साथ एक मुफ्त.

कहानियाँ, कथाएँ, रिपोर्ताज, किताबें, एस. एम. एस. / एम. एम. एस.,
मोबाइल जोक्स, गणक, इन्टरनेट और गप्पों के बाज़ार,

गाने – बजाने,
24 x 7 मेरे साथी.

मैंने सोचा,
चलो कुछ मीठा हो जाये.
टेढ़ा है पर मेरा है,
यह अन्दर की बात है.
बाकी सब,
जनरेशन गैप.

जो फिसला.
पाया अलग - थलग,

मैं बन गया,

कहानियाँ, कथाएँ, रिपोर्ताज, किताबें, एस. एम. एस. / एम. एम. एस.,
मोबाइल जोक्स, गणक, इन्टरनेट और गप्पों के बाज़ार,

गाने - बजाने,
24 x 7 मुझे लगे सताने.

मैंने सोचा,
जैसी करनी, वैसी भरनी.
मेरे अपने, रिश्ते नाते,
मेरी संस्कृति का आधार.

फिर चलो,
लिख लें कहानी,
मंदिरों से, घर के आँगन,
अपने संस्कारों की.

देखता हूँ, पीछे मुड़कर,

नयी फसल, आँधी में उलझी,
मस्त हो मंडरा रही.

मैं सहेली, अपनी बन,
अपनों की दुनिया में,
नए गीत गा रही.