Thursday, 2 June 2011

हास्य गीत - “पाई पाई का हिसाब पाई पाई का”

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.
पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

बाई मांगे, पैसे ज्यादा,
काम कम, बातें ज्यादा,
करें बाई का हिसाब, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

जैसी करनी, वैसी भरनी,
ऐसे, जीवन गाड़ी चलनी
करें साईं सब हिसाब, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

काटें खटमल, सारी रातें,
उस पर मच्छरों की बातें,
करें ताई, उपचार, चारपाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

हंसते, मोहल्ले में सारे,
रिश्तेदार, घर चौबारे,
करे नाई, बुरा हाल, घर-जमाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

मुन्ना चाहे, या हो, मुन्नी,
घर की बगिया, सुंदर इतनी,
करें दाई को बधाई, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

बिल्लू, गणित लगाता,
कुछ, भेजे में आता,
करे माई से सवाल, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

पहने टीशर्ट पे, जो टाई,
खावे लाई संगमलाई,
करें क्राई भौजाई, जगहँसाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

जिसके कम से कम हैं खर्चे,
उसने पाए बहुत चर्चे,
होवे राई का पहाड़, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

मेरे पापा जी, थे ऐसे,
जब भी देतेहमको पैसे,
लेते खर्च का हिसाब, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

पावें मीठा, फल वो भाई,
घूमे पीछे, घर लोगाई,
देवें पत्नी को उपहार, हाई-फाई सा.
करें पत्नी को प्यार, पाई पाई का.

पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.
पाई पाई का हिसाब, पाई पाई का.

Sunday, 22 May 2011

सूफी गीत - "मौला मेरे मौला ....................."

मौला, मौला, मौला, मौलामेरे मौला.............

अल्लाह ने नवाज़ा,
बड़े प्यार से, मेरे ख्वाजा,
मैं मुरीद बन गया हूँ,
जब से बुलावा आया,
जब नींद में बुलाया.
                                 
मौला, मौला, मौला, मौलामेरे मौला.............

मैं सर धरूँ टोकरिया,
नंगे पाँव, दरबार पहुंचूं.
तुझे चूमूं, करूँ मैं सदका,
तुझे चद्दर, फूल चढ़ाऊँ,
भर अंजुली, दूँ रेवड़ियाँ.      

मौला, मौला, मौला, मौलामेरे मौला.............

जो करूँ जतन कभी भी,
हर साँस में है तू ही,
है नमाज़ मेरी ख़ामोशी,
जगते हुए भी मदहोशी.

मौला, मौला, मौला, मौलामेरे मौला.............

मुझे पास तू बुला ले,
दरगाह में जगह दे,
मैं गीत तुझ पर लिखूं,
हर कौम फिर सराहे,

मौला, मौला, मौला, मौलामेरे मौला.............

मैं खाक में मिलूँ जब,
तेरे गीत बन कर बोलूँ,
गंग-जमुनी में बहूँ मैं,
और हिंद में मैं डोलूँ.

मौला, मौला, मौला, मौलामेरे मौला.............

Saturday, 7 May 2011

झुमरी तिलैया

जो पहुंचे रात कोराँची से, मंज़र, खुशनुमा था.
बरसते बादलों संग, हो रहा, अपना सफ़र था.

सोचा,

हजारों बाग,हजारीबाग की, धरती पर होंगे.
जो फुरसत काम से मिल जाये, उनका, लुत्फ़ लेंगे.

यहीं तो पास में, "झुमरी तिलैया", गाँव भी है.
सुना है अभ्रक की खानों का, वहाँ, इतिहास भी है.

जहाँ पर काम करते, कर्मकारों, को सुनाने.
उनकी फरमाईश पर, विविध-भारती पर, बजते थे गाने.

होड़ थी खानों में, देखें, किसके-कितने, गीत बजते.
समूचे मुल्क में थे लोग, झुमरी तिलैया, नाम सुनते.

यहीं पर आज, विज्ञान का, अनूठा, पर्व होगा.
सभी के सहयोग से, वृहद्, ताप विद्युत् गृह होगा.

यहाँ पर खूबसूरत झील, डैम के, आगोश में है.
जब मौसम आए तो आनंद भी, पिकनिक, में है.

सरहद पर रक्षा करते, बाँकुरों के, बच्चों की खातिर.
प्रकृति की गोद में स्थित, एक, सैनिक स्कूल भी है.

है रुकती राजधानी पास, "कोडरमा", शहर में.
जहाँ पर भी, एक नवनिर्मित, ताप विद्युत् गृह है.

सुबह होती है, कुछ लोगों की, ताड़ी, के रस से.
हम शरीफों को यहाँ के, बस, कलाकंद, में रस है.

उठे सुबह तो खाया, नाश्ता, सत्तू-पराठा.
गटक कर भर गिलास दूध, काम में, सर खपाया.

तभी तक, चेहरे पर मेरे, चमक, हिन्दोस्ताँ थी.
हाँ, किस्से ! माओवादी सुन, याद भगवान की, की.

Sunday, 1 May 2011

पिया गीत – “चिलचिलाती धूप में”

चिलचिलाती धूप मेंतेरा जल जाये तन,
रे पिया, मैंने ढक दिया, सूरज को बदरा बन.

जल रही धू - धू के धरती, गर्म हवाओं संग,
रे पिया, मैं जम के बरसी, बूँद ठंडी बन.

प्यास तुझको लग रही, और छटपटाए मन.
मैं सुराही बन पहुँच गई, पी ले मदिरा तन.

काज तुम संपन्न कर, जल्दी से आओ घर,
मैं तेरी बाँहों में झूलूँ, नन्ही मुन्नी बन.

Thursday, 21 April 2011

गीत – “मैं, पिया रंग डूब गई”

मैं, पिया रंग डूब गई,
मैं, पिया रंग डूब गई.

जब साजन को खीर दियो,
चीनी डालन भूल गई.

मैं, पिया रंग डूब गई.

जब मैं लाल, लाल रंग राची,
सुध बुध खोय दई.

मैं, पिया रंग डूब गई.

जब मैं लिखूं, कछुअपने पिया पर,
लिखना भूल गई.

मैं, पिया रंग डूब गई.

जब मैं लजा के उनसे भिड़ी,
तब मटकी फूट गई.

मैं, पिया रंग डूब गई.

सास ससुर के पैर जो पूजे,
पल्लू लेना भूल गई.

मैं, पिया रंग डूब गई.

जब मैं सखी सब बात बताऊँ,
जीभई काट लई.

मैं, पिया रंग डूब गई.

Tuesday, 19 April 2011

भजन – “बहुत ही भोले हैं हनुमान”

बहुत ही भोले हैं हनुमान,
बहुत ही चंचल हैं हनुमान.

मुख मंडल सब भाव विदित हैं,
भक्ति का देते हैं ज्ञान.

अष्ट सिद्धि, नव निधि सब पावें,
जो सुमिरें हनुमान.

माँ सीता की व्यथा भायी,
मुदरी दी, अंकित था राम.

भूख लगे तो बाग़ उजाड़ें,
जलातेलंका का अभिमान.

औषधि जो वो ढूंढ़ पावें,
उठालेंपर्वत को, बलवान.

Tuesday, 12 April 2011

भजन - “मम हृद, जन्मो हे श्री राम!”


मम हृद, जन्मो हे श्री राम!
बसो मेरी काया में श्री राम.

नैनों को प्रभु राम दरस हों,
कानों में गूंजें राम.

सांसों में हे राम बसो तुम,
मुख संस्कृति में राम.

रोम-रोम अभिराम समाय,
स्थिर हो मन राम.

बुद्धि विवेक राम रचि राखा,
नतमस्तक मैं राम.